9 रुपए का लालच, 15 लाख रुपए का नुकसान

अहमदाबाद। एक बस कंडक्टर को थोड़ा सा लालच इतना महंगा पड़ गया कि अब वह उसे जिंदगी भर नहीं भूल पाएगा। कंडक्टर ने एक यात्री को टिकट नहीं देकर मात्र 9 रुपए कमाने की कोशिश की थी लेकिन चेकिंग टीम ने मामला पकड़ लिया। इसके बाद कंडक्टर को ऐसी सजा मिली कि उसका 15 लाख रुपए का नुकसान हो गया।
मामला गुजरात राज्य परिवहन निगम का है। एक बस में चेकिंग टीम ने अचानक चेकिंग की। एक यात्री के पास टिकट नहीं मिला तो उससे पूछताछ की गई। यात्री ने बयान दर्ज कराया कि किराए की राशि 9 रुपए वह कंडक्टर को दे चुका है लेकिन उसने टिकट नहीं दिया। इस आधार पर चेकिंग टीम ने कंडक्टर सूरज पटेल के खिलाफ रिपोर्ट परिवहन निगम के मुख्यालय को भेज दी। मुख्यालय ने कंडक्टर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की। जांच कमेटी ने कंडक्टर को दोषी पाया और उनके वेतनमान को दो स्टेज तक घटाने की अनुशंसा की। इस आधार पर निगम मुख्यालय ने उनका वेतनमान दो स्टेज पीछे कर दिया। साथ ही यह आदेश भी दिया कि अब वे स्थायी रूप से इस निर्धारित वेतन पर ही अपनी बाकी नौकरी पूरी करेंगे अर्थात अब कोई वेतनवृद्धि नहीं होगी। परिवहन निगम के इस आदेश के विरुद्ध कंडक्टर पटेल ने पहले औद्योगिक न्यायालय और फिर हाईकोर्ट की शरण ली। दोनों कोर्ट से उनकी याचिका खारिज हो गई। हाईकोर्ट में कंडक्टर के वकील ने दलील दी थी कि मामूली जुर्म के लिए बड़ी सजा दी गई है। सजा का आकलन करें तो पटेल को पूरी नौकरी के दौरान 15 लाख रुपए का नुकसान होगा। परिवहन निगम के वकील ने कोर्ट को जानकारी दी कि इससे पहले भी कंडक्टर को 35 बार की गई गलतियों में मामूली जुर्माना और चेतावनी देकर छोड़ा जा चुका है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कंडक्टर की याचिका खारिज कर दी।